ग्रंथसार
तपस्या के पथ पर चलते हुए ऋतध्वज के धैर्य की परीक्षा एक ऐसी कठिन परिस्थिति में हुई, जिसने उनके चरित्र को स्वर्ण की भांति चमका दिया।
मार्कण्डेय पुराण · अध्याय 44
आस्था की अग्निपरीक्षा