ग्रंथसार
ब्रह्मांड की विशालता और काल की अनंतता का बोध ही मनुष्य को अहंकार से मुक्ति दिलाता है।
मार्कण्डेय पुराण · अध्याय 7
दैवीय काल और उसकी गणना