ग्रंथसार
जहाँ समय का चक्र भी रुक जाता है, उस पावन नैमिषारण्य की महिमा का वर्णन यहाँ किया गया है।
मत्स्य पुराण · अध्याय 14
नैमिषारण्य का महत्त्व