ग्रंथसार
रत्नधेनु का दान करने वाला भक्त साक्षात् भगवान विष्णु लोक में रत्नजड़ित सिंहासन पर आसीन होता है।
मत्स्य पुराण · अध्याय 34
रत्नधेनु दान