ग्रंथसार
तीर्थयात्रा केवल स्थानों का भ्रमण नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर की तीर्थ-यात्रा है।
नारद पुराण · अध्याय 23
तीर्थ सेवन का महात्म्य