ग्रंथसार
पवित्र तीर्थों का भ्रमण करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और भक्ति का उदय होता है।
नारद पुराण · अध्याय 42
तीर्थों का महिमामंडन