ग्रंथसार
अंधकार को मिटाने वाली वह दिव्य ज्योति ही परम ब्रह्म का स्वरूप है जो भक्तों के हृदय में निवास करती है।
पद्म पुराण · अध्याय 32
दिव्य ज्योति का अवतरण