ग्रंथसार
सृष्टि के विस्तृत जाल में छोटे-से कीट से लेकर विशालकाय पर्वतों तक, परमात्मा का अंश सर्वत्र व्याप्त है।
पद्म पुराण · अध्याय 51
जीवों की विविधता