ग्रंथसार
मथुरा की यात्रा का पुण्य सागर के समान अथाह है, जो जीव को समस्त पापों से मुक्त कर परम पद प्रदान करता है।
वराह पुराण · अध्याय 40
मथुरा यात्रा का फल