ग्रंथसार
वैकुंठकूप का जल साक्षात अमृत स्वरूप है, जिसे पीने मात्र से मनुष्य के शरीर के सभी रोग और दोष नष्ट हो जाते हैं।
वराह पुराण · अध्याय 46
वैकुंठकूप की महिमा