ग्रंथसार
मथुरा भगवान की लीलास्थली है, जहाँ की रज का कण-कण भक्ति और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
वराह पुराण · अध्याय 7
मथुरा मंडल का प्राकट्य