ग्रंथसार
पराशर मुनि ने सृष्टि के विकास में प्रधान, पुरुष और काल के त्रिकोणीय संबंध को विस्तार से समझाया।
विष्णु पुराण · अध्याय 2
प्रकृति का स्वरूप