ग्रंथसार
जिस परिहास को शूर्पणखा ने प्रणय का आश्वासन समझा, वही माता सीता पर आक्रमण करते ही उसके विरूपण का कारण बन गया।
अरण्यकाण्ड · सर्ग 18
शूर्पणखा का विरूपण