ग्रंथसार
मार्ग में अमंगल की चेतावनियाँ थीं, आकाश में विनाश के संकेत—किन्तु खर को अपने बल के आगे सब तुच्छ दिखाई दे रहा था।
अरण्यकाण्ड · सर्ग 23
खर की सेना के प्रयाण पर अमंगलकारी अपशकुन