ग्रंथसार
आने वाली राक्षस-सेना से पहले भगवान श्रीराम ने एक और दायित्व सँभाला—माता सीता को सुरक्षित करके ही उन्हें युद्धभूमि में खड़ा होना था।
अरण्यकाण्ड · सर्ग 24
श्रीराम की युद्ध-सज्जा और सीता जी की सुरक्षा