ग्रंथसार
जिस रावण के सामने देवता भी संकट अनुभव करते थे, उसी की सभा में अब जनस्थान के विनाश से भयाकुल उसकी बहन पहुँच रही थी।
अरण्यकाण्ड · सर्ग 32
शूर्पणखा का लंका पहुँचना और रावण के दर्शन