ग्रंथसार
समुद्रतट के रमणीय वनों और गरुड़ के पराक्रम की स्मृति सँजोए विशाल वटवृक्ष को पार करता रावण आज मारीच के एकांत आश्रम की ओर जा रहा था।
अरण्यकाण्ड · सर्ग 35
रावण की मारीच के आश्रम की यात्रा