ग्रंथसार
जिस योजना को रावण अपनी विजय का उपाय मान रहा था, उसे सुनते ही मारीच का मुख भय से सूख गया।
अरण्यकाण्ड · सर्ग 36
रावण का मारीच से सहायता माँगना