ग्रंथसार
पंचवटी के शांत एकांत में एक मायावी मृग का आगमन सीता के मन को मोह लेता है और राम के नियति-पथ का निर्णायक मोड़ बन जाता है।
अरण्यकाण्ड · सर्ग 43
सीता का स्वर्णमृग पर मुग्ध होना और राम का संकल्प