ग्रंथसार
सीता की अभिलाषा पूर्ण करने के लिए श्रीराम स्वर्णमृग का पीछा करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप मारीच का छद्म प्रपंच और महाविनाश की पृष्ठभूमि तैयार होती है।
अरण्यकाण्ड · सर्ग 44
स्वर्णमृग का वध और मारीच का मायावी क्रंदन