ग्रंथसार
अधर्म के मार्ग पर चले रावण ने जब सीता के समक्ष अपना परिचय दिया, तो उसे अपनी शक्ति का अहंकार था, किंतु माँ सीता के ओजस्वी वचनों ने उस अहंकार को धुल कर रख दिया।
अरण्यकाण्ड · सर्ग 47
रावण का आत्म-परिचय और सीता का ओजस्वी तिरस्कार