ग्रंथसार
सीता के विरह में डूबे श्रीराम का हृदय विलाप की अग्नि में जल रहा है और उनके भीतर का पुरुषार्थ, करुणा और व्याकुलता के भंवर में फँस गया है।
अरण्यकाण्ड · सर्ग 63
श्रीराम का विलाप और गहन शोक