ग्रंथसार
सीता के विरह में प्रलयंकर क्रोध से धधकते राम को लक्ष्मण के धीर वचनों ने पुन: कर्तव्य पथ पर अग्रसर किया।
अरण्यकाण्ड · सर्ग 64
लक्ष्मण द्वारा श्री राम के क्रोध का शमन