ग्रंथसार
वीर जटायु का पार्थिव शरीर पंचतत्वों में विलीन होता है और उनके बलिदान से श्रीराम के हृदय में एक गहरा भावुक सूत्र जुड़ जाता है।
अरण्यकाण्ड · सर्ग 68
जटायु का देहत्याग और अंतिम संस्कार