ग्रंथसार
क्या शस्त्र केवल हाथ में रहते हैं, या धीरे-धीरे मन का स्वभाव भी बदल देते हैं? माता सीता की चिंता इसी सूक्ष्म प्रश्न से जुड़ी थी।
अरण्यकाण्ड · सर्ग 9
सीता जी का अहिंसा विषयक विचार