ग्रंथसार
मंदाकिनी के तट पर रखा इंगुदी का पिण्ड देखकर महारानी कौसल्या के सामने पति का बिछोह और पुत्र का वनवासी जीवन एक साथ साकार हो उठे।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 104
माताओं का आश्रम में आगमन और कौसल्या का विलाप