ग्रंथसार
पिता की आज्ञा को अटल मानकर बैठे भगवान श्रीराम के सामने जाबालि ने प्रश्न रखा—जो प्रत्यक्ष है, उसे अदृश्य के लिए क्यों छोड़ें?
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 108
जाबालि द्वारा सांसारिक युक्तियों से राम को प्रबोधन