ग्रंथसार
भरत ने वनवास स्वयं लेने का प्रस्ताव रख दिया, पर क्या भगवान श्रीराम पिता की आज्ञा किसी दूसरे से पूरी करा सकते थे?
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 111
महर्षि वसिष्ठ का उद्बोधन और भरत का आग्रह