ग्रंथसार
श्रीराम की चरण-पादुकाओं को सिंहासन पर आरूढ़ कर भरत ने अयोध्या के राजकाज को सेवा-भाव के एक नए युग में बदल दिया।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 115
नन्दिग्राम में पादुका-प्रतिष्ठा