ग्रंथसार
जिस रात्रि के बाद पुत्र का राज्याभिषेक होना था, उसी रात्रि महाराज दशरथ कभी भोर को रोकना चाहते थे और कभी अँधेरे को शीघ्र विदा कर देना चाहते थे।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 13
दशरथ का दारुण विलाप और रात्रि का संताप