ग्रंथसार
राजपथ पर उमड़ी अयोध्या की आँखों में एक ही अभिलाषा थी—अपने प्रिय भगवान श्रीराम को राज्याभिषेक से विभूषित देखना।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 17
श्रीराम का राजपथ पर भव्य प्रस्थान