ग्रंथसार
जिस पुत्र के राज्याभिषेक के लिए माता ने मंगलाग्नि प्रज्वलित की थी, उसी के मुख से अब चौदह वर्ष के वनवास का समाचार सुनना था।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 20
माता कौसल्या का दारुण विलाप