ग्रंथसार
सुमन्त्र के वचन कठोर थे, पर उनके पीछे एक ही व्यथा थी—क्या कैकेयी अपने हठ के सामने महाराज दशरथ के प्राणों का भी मूल्य नहीं समझेंगी?
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 35
सुमन्त्र द्वारा कैकेयी को धिक्कार