ग्रंथसार
एक ओर पिता पुकार रहे थे—रथ रोको; दूसरी ओर पुत्र कह रहे थे—आगे बढ़ो। उस दिन अयोध्या में विदाई का एक-एक क्षण असह्य हो उठा था।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 40
अयोध्या से प्रस्थान और प्रजा का विलाप