ग्रंथसार
भगवान श्रीराम का रथ आगे बढ़ा, पर उनके वियोग में अयोध्या का जीवन मानो वहीं ठहर गया।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 41
अयोध्या का दारुण शोक