ग्रंथसार
महारानी सुमित्रा ने शोक में डूबी माता को उनके पुत्र का वही सामर्थ्य याद दिलाया, जिसे वियोग की व्यथा ने आँखों से ओझल कर दिया था।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 44
सुमित्रा द्वारा कौशल्या को सान्त्वना