ग्रंथसार
वन की उस रात श्री लक्ष्मण को अपने विश्राम की नहीं, अयोध्या में छूटे प्रियजनों के जीवन की चिंता थी।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 51
लक्ष्मण और गुह का रात्रि-संवाद