ग्रंथसार
यमुना की वेगवती धारा के बीच माता सीता की प्रार्थना में एक ही अभिलाषा थी—वनवास का व्रत पूरा हो और अपने प्रियजनों से फिर मिलन हो।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 55
यमुना पारगमन और श्याम वट का पूजन