ग्रंथसार
सुमन्त्र वन से लौटे थे—अब उन्हें एक व्याकुल माता को बताना था कि राजमहल से दूर भी उसके पुत्र और पुत्रवधू दीन नहीं हुए हैं।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 60
सुमन्त्र द्वारा कौसल्या को सांत्वना