ग्रंथसार
जिस राजा से सबको आश्रय मिलता था, उसी के सामने आज एक माता पूछ रही थी—मेरे पुत्र को वन भेजकर आपने मेरे लिए कौन-सा सहारा छोड़ा है?
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 61
कौशल्या का हृदयविदारक विलाप