ग्रंथसार
जिस पुत्र-वियोग की अग्नि में कभी एक असहाय तपस्वी जला था, वही अग्नि अब अयोध्या के महाराज के प्राणों तक आ पहुँची थी।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 64
मुनि का शाप और महाराज दशरथ का देहावसान