ग्रंथसार
अयोध्या के सामने अब केवल महाराज दशरथ के वियोग का दुःख नहीं था—प्रश्न यह था कि राजा के बिना धर्म, मर्यादा और प्रजा की रक्षा कौन करेगा।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 67
अराजक राज्य की दुर्दशा का वर्णन