ग्रंथसार
भरत का अशुभ स्वप्न—एक ऐसी रात, जिसकी भयावह छाया मित्रों के हास-परिहास से भी नहीं मिट सकी।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 69
दूतों की केकय देश की ओर तीव्र यात्रा