ग्रंथसार
जिस राज्य को माता कैकेयी अपने पुत्र का सौभाग्य समझ रही थीं, श्री भरत ने उसी को अपने जीवन का सबसे बड़ा अनर्थ कह दिया।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 73
भरत द्वारा कैकेयी की भर्त्सना