ग्रंथसार
श्री भरत की यात्रा के लिए अब वन के दुर्गम पथ पर हजारों हाथ जुटे थे—कहीं बाधाएँ हट रही थीं, कहीं वृक्ष लग रहे थे और कहीं नए जलाशय आकार ले रहे थे।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 80
वन-मार्ग का भव्य निर्माण