ग्रंथसार
प्रभात के राजसी वाद्य सुनते ही भरत ने उन्हें रुकवा दिया—जिस सिंहासन के अधिकारी वन में थे, उसका सम्मान वे कैसे स्वीकार करते?
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 81
महर्षि वशिष्ठ द्वारा राजसभा का आयोजन