ग्रंथसार
गंगा-तट पर उमड़ी सेना को देखकर निषादराज गुह के मन में एक ही चिंता उठी—क्या यह यात्रा भगवान श्रीराम के हित के लिए है?
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 84
गुह और भरत का मिलन तथा भरत का सदिच्छा प्रकट करना