ग्रंथसार
तृणों की उस दबी हुई शय्या में श्री भरत को अपने भाई का कष्ट ही नहीं, अपने लिए त्याग का मार्ग भी दिखाई दिया।
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 88
श्रीराम की तृण-शय्या देखकर भरत का विलाप