ग्रंथसार
जिस भरत ने राज्य लौटाने के लिए वन का मार्ग लिया था, उन्हीं से महर्षि ने पूछा—कहीं तुम श्रीराम का अनिष्ट करने तो नहीं आए हो?
अयोध्याकाण्ड · सर्ग 90
महर्षि भरद्वाज द्वारा दिव्य आतिथ्य का संकल्प