ग्रंथसार
सरयू के तट पर उस दिन राजमहल से निकले दो कुमारों की यात्रा, गुरु के सान्निध्य में ज्ञान की यात्रा बन गई।
बालकाण्ड · सर्ग 22
वसिष्ठ का वचन